केंद्र जम्मू कश्मीर में बागवानी किसानों को हुए नुकसान को राष्ट्रीय आपदा घोषित करें-एआईकेएससीसी



केंद्र जम्मू कश्मीर में बागवानी किसानों को हुए नुकसान को राष्ट्रीय आपदा घोषित करें-एआईकेएससीसी



 

जम्मू-कश्मीर में सरकार की सख्ती और बेमौसम बर्फबारी से सेब और केसर के साथ अन्य बागवानी फसलों को भारी क्षति हुई है जिससे राज्य के किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है, जिससे कि राज्य के किसानों को तत्काल सहायता राशि मुहैया कराई जा सके।


एआईकेएससीसी के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 13 से 15 नवंबर तक जम्मू-कश्मीर का दौरा कर सेब और केसर के साथ ही अन्य बागवानी फसलों का जायजा लिया। एआईकेएससीसी के संयोजक वीएम सिंह ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार की सख्ती के साथ बेमौसम बर्फबारी से किसानों को भारी घाटा लगा है। सितंबर में सेब की फसल पक जाती है, जबकि केंद्र सरकार की पाबंदी के कारण किसान सेब की समय पर तुड़ाई नहीं कर पाये। फोन और इनटनेंट सेवा बंद होने की वजह से आढ़तियों से संपर्क नहीं कर पाये, जिस कारण फसल बर्बाद हो गई। रही-सही कसर बेमौसम बर्फबारी ने पूरी कर दी। भारी बर्फबारी से बगीचों में सेब के पेड़ टूट गए, जिसका नुकसान किसानों को अगले चार-पांच सालों तक भुगतना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि हालात यह है कि जम्मू-कश्मीर में सेब किसानों के बच्चे सेब की खेती नहीं करना चाहते, क्योंकि बागवानी फसलों का बीमा नहीं होने के कारण इसकी खेती सुरक्षित नहीं है। इसलिए हमारी सरकार से मांग है कि सेब के साथ ही अन्य बागवानी फसलों के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किए जाएं।


केंद्र ने कुल उत्पादन का मात्र 0.01 फीसदी सेब ही खरीदा है


जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक योगेंद्र यादव ने बताया कि सरकार की पाबंदी और भारी बर्फबारी से सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार किसानों से नेफेड के माध्यम से सेब की खरीद तो कर रही है, लेकिन नाममात्र की खरीद होने के कारण किसानों को इसका लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक नेफेड ने मात्र 1.36 लाख बक्से सेब के खरीदे हैं जबकि पिछले साल राज्य में 10 करोड़ बक्से सेब का उत्पादन हुआ था जबकि चालू सीजन में सेब के उत्पादन का अनुमान 11 करोड़ बक्से होने का था। उन्होंने बताया कि नेफेड ने कुल उत्पादन का मात्र 0.01 फीसदी सेब ही खरीदा है, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने किसानों को इसका लाभ मिला है।


स्थानीय किसानों के अनुसार 70 फीसदी से ज्यादा नुकसान का अनुमान


आल इंडिया किसान सभा के पी कृष्णा प्रसाद ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में सेब के साथ ही अन्य बागवानी फसलों के किसानों को भारी नुकसान हुआ है, जबकि राज्य में बागवानी फसलों के लिए फसल बीमा योजना भी नहीं है, जिस कारण किसानों को बीमा की सुविधा भी नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य के बागवानी विभाग के अधिकारियों का माना है कि नुकसान करीब 35 फीसदी फसलों को हुआ है, जबकि स्थानीय किसानों का कहना है कि राज्य में बागवानी किसानों को इस बार 70 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ है।


राष्ट्रीय आपदा घोषित कर किसानों के नुकसान की हो भरपाई


स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता एवं पूर्व लोकसभा सांसद राजू शेट्टी ने कहा हमारी सरकार से मांग है कि जम्मू-कश्मीर में सेब एवं अन्य बागवानी फसलों को हुए नुकसान को केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा घोषित करे। फसलों को हुए नुकसान का डिटेल सर्वे हर खेत के आधार पर हो होना चाहिए, तथा जल्द से जल्द केंद्र सरकार को किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों के केसीसी ऋण माफ होने चाहिए। उन्होंने कहा कि एआईकेएससीसी से देशभर के 250 किसान संगठन जुड़े हुए हैं, तथा 29 और 30 नवंबर को एआईकेएससीसी की सालाना बैठक दिल्ली में होगी, जिसमें जम्मू-कश्मीर के किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल भी दिल्ली आयेगा।