विभाजनकारी राजनीति और बड़ी पूंजी की सेवा का छुपा एजेंडा - गतांक से आगे जारी

विभाजनकारी राजनीति और बड़ी पूंजी की सेवा का छुपा एजेंडा -


गतांक से आगे जारी


पुरुषोत्तम शर्मा


 


मोदी राज में डेढ़ गुना बढ़ा बीफ का उत्पादन


अब अगर इस समस्या के दूसरे पहलू पर गौर करें तो आंकड़े और भी चोंकाने वाले हैं. मोदी-योगी राज में भी भारत बीफ के उत्पादन में दुनिया में पांचवें नंबर पर है. दुनिया में बीफ की घरेलू खपत के मामले में भारत का नम्बर सातवाँ है. आंकड़ों के अनुसार सन् 2012 में देश में उत्पादित 36.12 लाख टन बीफ में से 20 लाख टन की खपत देश के अन्दर हुई और बाक़ी बियतनाम, मलेशिया, सउदी अरब. कुवैत व मिश्र जैसे देशों को निर्यात किया गया.


मोदी राज में वर्ष 2014-15 में तो बीफ का यह निर्यात 16 हजार टन से डेढ़ गुना बढ़ कर 24 हजार टन की मात्रा को छू गया. भारत की भी 70 प्रतिशत आबादी मांसाहारी है. जो लोग बीफ को सिर्फ मुसलामानों के खान-पान से जोड़ते हैं उन्हें इन आंकड़ों पर ध्यान देना चाहिए. सन् 2011-12 की एक गणना के अनुसार भारत में 8 करोड़ लोग बीफ खाते हैं. भारत में मात्र 6 करोड़ मुसलमान ही बीफ खाते हैं. 1.25 करोड़ हिन्दू भी बीफ खाते हैं और बीफ खाने वाले इन हिन्दुओं में 7 प्रतिशत ऊंची जाति के हैं. भारत में बीफ खाने वाले लोगों में संख्या के हिसाब से मुसलमानों के बाद हिन्दुओं की संख्या ज्यादा है. पर आबादी के प्रतिशत में देखें तो भारत में ईसाई बीफ खाने में दूसरे नंबर पर हैं.  


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