क्या अब कोरोना के सिद्धलिंगेश्वर नाम के आंकड़े भी अलग से जारी होंगे?

क्या अब कोरोना के सिद्धलिंगेश्वर नाम के आंकड़े भी अलग से जारी होंगे?


श्याम सिंह रावत/पुरुषोत्तम शर्मा


कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में सिद्धलिंगेश्वर में निकली विशाल रथयात्रा,


कोरोना संकट और लॉकडाउन के बावजूद कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में स्थित चित्‍तपुर गांव में हर साल की तरह इस बार भी सिद्धलिंगेश्‍वर धार्मिक मेला आयोजित किया गया। इसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेसिंग के दिशा-निर्देशों की इस कार्यक्रम में धज्जियां उड़ाई गईं। मेले में सिद्धलिंगेश्वर विशाल रथयात्रा निकाली गई। यहां लिंगायत समुदाय की सबसे बड़ी पीठ है। 


यह मामला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि भारत में कोविड-19 संक्रमण से पहली मौत की खबर कलबुर्गी ज़िले से ही आयी थी। कलबुर्गी देश का पहला ऐसा ज़िला है जिसे हॉटस्पॉट घोषित किया गया था। इसके कोरोना संक्रमित मरीज़ों वाले इलाक़े को पूरी तरह सील कर दिया गया था। इस जिले में कोविड-19 संक्रमण से अब तक 3 लोग मर चुके है, 20 एक्टिव केस हैं।


इसके बावजूद राज्य की भाजपा सरकार द्वारा बरती गई इस आपराधिक लापरवाही की जिम्मेदारी से कुछ स्थानीय अधिकारियों पर कार्यवाही कर बचा नहीं जा सकता है। कार्यक्रम की प्रकृति बता रही है कि राज्य के मुख्यमंत्री की मौन सहमति इस आयोजन के पीछे रही होगी। अतः इस मामले की उच्च स्तरीय न्याययिक जांच भी जरूरी है।


घटना के बाद ज़िला प्रशासन ने गांव को सील कर दिया है। इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग मानकों का उल्लंघन करने वालों पर अंकुश लगाने में विफल रहने के कारण चित्तपुर तालुक़ के डिवीज़नल मजिस्ट्रेट और एक पुलिस सब इंस्पेक्टर को निलंबित करने के साथ ही 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 


जिस तरह गोदी मीडिया और सत्ताधारी वर्ग ने तबलीगी जमातियों के नाम से पूरी मुस्लिम कौम को कोरोना फैलाने का आरोपी बताया था, क्या अब इन लोगों के नाम से पूरे हिंदू समाज को भी कोरोना फैलाने का आरोपी सिद्ध करेंगे?