अलविदा प्यारे साथी पुरुषोत्तम असनोड़ा! तुम हमेशा याद रहोगे!

अलविदा प्यारे साथी पुरुषोत्तम असनोड़ा! तुम हमेशा याद रहोगे


पुरुषोत्तम शर्मा


पुरुषोत्तम असनोड़ा जैसे एक अजीज मित्र का आज हम सब को विदा कह जाना काफी पीड़ा दे गया। उनके साथ ही हमने एक अच्छा मित्र, जन आंदोलनों का मजबूत साथी और जनता के प्रति प्रतिबद्ध एक निर्भीक पत्रकार खो दिया है। 


उत्तराखंड और देश भर से कोई भी जनांदोलनों और लेखन से जुड़ा व्यक्ति गैरसैण के रास्ते जाय और असनोड़ा जी से न मिले, ऐसा सम्भव नहीं था। गैरसैण में उनका घर हर किसी का शैल्टर था। पहाड़ की लंबी यात्राओं में उनका हर परिचित उनके घर में एक रात्रि विश्राम का कार्यक्रम बना कर जाता था। हम दोनों एक ही नाम के थे, इसलिए वे मुझे हमेशा "नाम राशि" नाम से पुकारते थे। 


असनोड़ा जी के जाने के साथ ही पहले से दुखों के पहाड़ नीचे दबी उनकी बड़ी बेटी गंगा पर तो अब जैसे हिमालय ही गिर आया है। गंगा के पति और ससुर जी की एक ही साथ अंत्येष्टि और कुछ समय बाद उसके देवर की भी मृत्यु के शोक से उबारने में असनोड़ा जी गंगा का सबसे बड़ा संभल बने थे। उन्होंने गंगा को न सिर्फ परिवार की बागडोर संभालने में बल्कि पति की बैद्धिक विरासत और उनके द्वारा स्थापित पत्रिका को भी आगे बढाने में साहस के साथ खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 


अभी असनोड़ा जी को पड़े दिल के दौरे के एक दिन पहले गंगा की सास को भी दिल का दौरा पड़ा था। उनका भी देहरादून में दिल का ऑपरेशन हुआ है। गंगा के साथ हो रही एक के बाद एक इन असहनीय घटनाओं में उसे साहस देने वाला सबसे मजबूत स्तम्भ भी आज उससे बिछुड़ गया है।


पर मूझे विश्वास है कि बेटी गंगा इस आघात से भी मजबूती के साथ उबर कर आगे बढ़ेगी। उसे मजबूती से खड़ा होना ही होगा! क्योंकि उसे अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने के साथ ही अपने आने वाले भविष्य यानी बच्चों की बेहतर परिवरिश भी करनी है।


अलविदा प्यारे साथी पुरुषोत्तम असनोड़ा! तुम हमेशा याद रहोगे।